Saturday, August 8, 2009

बूँदें!


बूँदें!
आँखों से टपकें
मिट्टी हो जाएँ।

आग से गुज़रें
आग की नज़र हो जाएँ।

रगों में उतरें तो
लहू हो जाएँ।

या कालचक्र से निकलकर
समय की साँसों पर चलती हुई
मन की सीप में उतरें
और मोती हो जाएँ.....

सीता की परीक्षा

हर बार क्यों लक्षमण रेखा खिचती है?
हर बार क्यों अग्नि परीक्षा होती है?

जब राम ही नही है आज यहाँ?
फिर सीता की इच्छा क्यों होती है?

हर बार जब स्त्री की परीक्षा लेनी हो
वो राम का रूप क्यों धरता है?

याद रखे हर वो पुरुष
जो सीता की इच्छा रखता है
राम भी तुम, लक्षमण भी तुम और रावण भी तुम
तुम ही संरक्षक और भक्षक भी तुम

फिर सीता का दोष ही क्यों दिखता है?

जो बच गयी हर परीक्षा से वो सीता थी…
आम नारी नही…
वो भी…
दूजी परीक्षा मे, धरती मे समा गयी…

आज जब तुम, राम ना बन सकते हो
फिर सीता की परीक्षा क्यों लेते हो?

कहो ना ये कैसा अजनबीपन है..???

क्यों एक दूजे से हम
इतने बेखबर है..?
क्यों बस कहने की
खातिर सब अपने है..??
मिलते ही निगाहें,
फेर ली नजर इधर-उधर...
कहो तो ये कैसा अपनापन है...???

ना हम पूरी तरह
अपने है
ना ही इस अजनबीपन में
समर्पण है..
वफादारी निभाई हमने
किसके साथ..
कहो ना ये कैसा अजनबीपन है..???






Kyon ek duje se ham
itne bekhabar hain..?
kyon bas kehne ki
khatir sab apne hain..??
milte hi nigahen,
pher li nazar idhar-udhar. ..
kaho to ye kaisa apnapan hai...???

Na ham puri tarah
apne hain
na hi is ajanabipan mein
samarpan hai..
wafadari nibhai hamne
kiske sath..
kaho na ye kaisa ajanabipan hai..???

प्यास थी पानी था पिया ही नहीं....

चाक दामन कभी सिया ही नहीं
शिकवा कभी किया ही नहीं
प्यार उसको मज़ाक लगता है
वो प्यार जिसने कभी किया ही नहीं
मांगने वाला मांगता ही रहा
देने वाले ने कुछ दिया ही नहीं
दे रहा था मगर हिकारत से
मैं भी खुद्दार था लिया ही नहीं
मेरे मौला तेरा कहा माना
प्यास थी पानी था पिया ही नहीं....



Chaak daman kabhi siya hi nahi
Shikva kabhi kiya hi nahi
Pyar usko mazak lagta hai
Wo pyar jisne kabhi kiya hi nahi
Mangne wala mangta hi raha
Dene wale ne kuch diya hi nahi
De raha tha magar hiqarat se
Mai bhi khuddar tha liya hi nahi
Mere maula tera kaha maana
Pyas thi paani tha piya hi nahi.....

उन के बदले हुए तेवर नहीं देखे जाते...

अब छलकते हुए सागर नहीं देखे जाते
तौबा के बाद ये मंज़र नहीं देखे जाते

मस्त कर के मुझे औरों को लगा मूँह साकी
ये करम होश में रह कर नहीं देखे जाते

साथ हर एक को इस राह में चलना होगा
इश्क में रहज़न-ओ-रहबर नहीं देखे जाते

हम ने देखा है ज़माने का बदलना लेकिन
उन के बदले हुए तेवर नहीं देखे जाते...





Ab chhalakte huye sagar nahin dekhe jate
Touba ke bad ye manzar nahin dekhe jate

Mast kar ke mujhe auron ko laga munh saki
Ye karam hosh mein reh kar nahin dekhe jate

Sath har ek ko is rah mein chalna hoga
Ishk men rahajan-o-rahbar nahin dekhe jate

Ham ne dekha hai zamane ka badalna lekin
Un ke badle huye tevar nahin dekhe jate...

चले आओ....!!

चांदनी का पैराहन
पुराना हो चला है
घिस गया है
रंग भी जा चुका है
कितनी ही रातों
और दिनों को
तड़प के अलाव में
डाल चुकी हूँ
इंतज़ार की ठण्ड है
न जाती है
न कम होती है....
ठण्ड
अब दर्द बन रही है
इस से पहले
कि मैं रूह बचाने को
जिस्म उतार के
अलाव में डाल दूँ

चले आओ....!!




Chandni ka pairahan
Purana ho chala hai
Ghis gaya hai
Rang bhi ja chuka hai
Kitni hi raton
Aur dino ko
Tadap ke alaav mein
Daal chuki hun
Intazar ki thand hai
Na jati hai
Na kam hoti hai....
Thand
Ab dard ban rahi hai
Is se pehle
Ki main rooh bachane ko
Jism utar ke
Alaav mein dal dun

CHALE AAO....!!

बस एक बार आ जाओ...


थोडी सी बारिश
और ढेर सारा प्यार...
यही तो माँगा था न

तुमने कहा कि
तुम्हारे घर
बारिश हुई है
पर
मेरा घर आंगन
तो सूना था...
तुम्हारे बिन
और होता भी कैसा...

इस बार जब आना
तो
मेरे हिस्से की बारिश
और
मेरे हिस्से का प्यार
साथ लाना...

हम
एक दुसरे के कांधे पर
सिर रख कर
रो लेंगे...
गिले शिकवे
दूर कर लेंगे...
और बहा देंगे
तुम्हारी लायी
बारिश के साथ...

फिर
छिटका देंगे
घर के कोने कोने में
ढेर सारा प्यार...
बस एक बार आ जाओ...





Thodi si barish
aur dher sara pyar...
yahi to manga tha na

tumne kaha ki
tumhare ghar
barish hui hai
par
mera ghar angan
to soona tha...
tumhare bin
aur hota bhi kaisa...

is baar jab aana
to
mere hisse ki barish
aur
mere hisse ka pyar
saath lana...
ham
ek dusre ke kaandhe par
sir rakh kar
ro lenge...
gile shikwe
door kar lenge...
aur baha denge
tumhari layi
barish ke saath...

phir
chhitka denge
ghar ke kone kone mein
dher sara pyar...
bas ek baar aa jao...